जल संरक्षण हेतु नगर परिषद अध्यक्ष सम्पा साहा ने केंद्रीय मंत्री को लिखा पत्र

पाकुड। पानी को लेकर पूरी दुनिया में बढ़ने वाली मुश्किलों के चलते बेहतर है कि बारिश के एक-एक बूंद को बचाया जाए। सदियों से हमारे पूर्वज इस दिशा में काम कर रहे हैं।वर्तमान जल संरक्षण सबसे महत्वपूर्ण है।जल संरक्षण एवं नगर परिषद क्षेत्र में अवस्थित ऐतिहासिक तालाबों के संरक्षण के लिए नगर परिषद अध्यक्ष  सम्पा साहा ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री,  भारत सरकार गजेंद्र सिंह शेखावत को पत्र लिखा है।जिसमें श्रीमती साहा ने कहा है कि लगभग 9 किलोमीटर में फैले पाकुङ नगर परिषद क्षेत्र में कुल 42 तालाब का एक ऐसा सिरिज है जो शहर के दोनों और अवस्थित है। झारखंड सरकार के द्वारा जुडको के माध्यम से पानी को पूर्णरूपेण संरक्षित रखने के लिए भौगोलिक सूचना प्रणाली आधारित मास्टर प्लान और क्षेत्र विकास का ड्राफ्ट तैयार किया गया है।यहां यह बताना भी आवश्यक है कि प्राचीन काल में कंचनगढ़ की पहाड़िया राजकुमारी हेमा सुंदरी,खेमा सुंदरी तथा महाराजा कालीदास  के पूर्वजों के संयुक्त प्रयास से ही क्षेत्र में कई तालाबों का निर्माण किया गया था। पिछले दिनों कुमार कालिदास मेमोरियल कॉलेज पाकुड़ में पारिस्थितिकी तंत्र पर आयोजित सेमिनार में विशेषज्ञों ने बताया था कि पाकुड़ में तालाबों की श्रृंखला भूमिगत पानी को जोड़ने वाली इंजीनियरिंग तथा डिजाइन चंदेल कालीन तालाबों की श्रृंखला से मिलती जुलती है।जिसे वैज्ञानिकता की कसौटी पर देखने की जरूरत है। इसी सुझाव के मद्देनजर नगर परिषद अध्यक्ष सम्पा साहा ने इस अमूल्य धरोहर को वर्तमान में संरक्षित और सुरक्षित रखने की आवश्यकता हेतु केंद्रीय मंत्री को इस महती कार्य को अग्रेतर कार्रवाई की लिए अनुरोध किया है,जिसमें इस वाॅटर बॉडीज के अधोसंरचना का निर्माण को व्यवस्थित करना,जुडको के द्वारा निर्देशित प्रक्रिया के अनुपालन को सुरक्षित करने के लिए तालाबों को डी-ड्रेन करते हुए आसपास ड्रेनेज सीवरेज सिस्टम को दुरुस्त करना,इन तालाबों को लोकल पार्क व टूरिज्म के रूप में विकसित करना,इन तालाबों के प्रदूषण मापन,जैविक परीक्षण और   जल-शोधन डी-सिल्ट करने की व्यवस्था सुनिश्चित करना आदि शामिल है।यहाँ यह बताना भी आवश्यक है कि पेयजल एवं स्वच्छता विभाग और यूनिसेफ की रिपोर्ट बताती है कि झारखंड के गढ़वा और पलामू जिला से फ्लोराइड युक्त और असैनिक पानी का विस्तार पाकुङ जिले तक हो रहा है- नगर अध्यक्ष द्वारा उठाए गए इस कदम को एक बहुत ही महत्वपूर्ण पहलू के रूप में इसे देखा जा रहा है।अगर यह परियोजना परवान चढ़ती है तो जल संरक्षण की दिशा में पाकुड़ में एक नए आयाम स्थापित करेगा।

 

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