हाई पावर्ड पैनल ने ‘सर्कुलर इकोनोमी के माध्यम से प्लास्टिक न्यूट्रेलिटी’ की थीम पर चर्चा की

High powered panel discusses the theme of 'Plastic Neutrality through Circular Economy'

मैस्से म्युनशेन इंडिया नई दिल्ली के राजेन्द्र पेलेस पर स्थित जेपी सिद्धार्थ में आईएफएटी इंडिया के नौंवें संस्करण के एक्सक्लुज़िव शो प्रीव्यू का आयोजन करने जा रहे हैं। आईएफएटी इंडिया 2022 का आयोजन 28-30 सितम्बर 2022 को मुंबई के बॉम्बे एक्ज़हीबिशन सेंटर में होगा। आईएफएटी इंडिया एनवायरनमेंटल टेक्नोलॉजीज़ के लिए देश के अग्रणी कारोबार मेलों में से एक है। इसे उद्योग जगत के विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और कारोबार दिग्गजों के बीच हाई पावर्ड प्लेटफॉर्म के रूप में जाना जाता है। इस मंच पर यह दिग्गज पर्यावरणी चुनौतियों जैसे व्यर्थ जल उपचार, अपशिष्ट प्रबन्धन, रीसायक्लिंग जैसे मुद्दों पर चर्चा करते हैं। नई दिल्ली में शो प्रीव्यू की थीम है ‘सर्कुलर इकोनोमी के माध्यम से प्लास्टिक न्यूट्रेलिटी’ जहां हाई प्रोफाइल दिग्गज, उपभोक्ताओं के व्यवहार और मानसिकता में बदलाव द्वारा प्लास्टिक न्यूट्रल इकोनोमी के महत्व पर ज़ोर देंगे।

शो प्रीव्यू के हाई पावर्ड पैनल में संचिता जिंदल, पूर्व सलाहकार, (साइन्टिस्ट जी), पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय; जुषार रंजन पटनायक, कॉर्पोरेट हैड- ईएचएस, डाबर इंडियर; डॉ केएस जयचन्द्रन, सदस्य सचिव, दिल्ली प्रदूषण नियन्त्रण समिति; महेन्द्र सिंह तंवर, कमिश्नर, गाज़ियाबाद नगर निगम और चंदर मोहन गुप्ता, मेयर, जम्मु नगर निगम शामिल होंगे। इस पैनल चर्चा का संचालन डॉ आशीष जैन, डायरेक्टर, भारतीय प्रदूषण नियन्त्रण संगठन द्वारा किया जाएगा।

इस मौके पर डॉ के एस जयचन्द्रन ने कहा, ‘‘दिल्ली सरकार प्लास्टिक अपशिष्ट में कमी लाने के लिए सक्रिय कदम बढ़ा रही है। 19 सिंगल यूज़ प्लास्टिक पहले से बैन किए जा चुके हैं और आने वाले समय में ऐसे और प्रतिबंध लगाए जाएंगे। इस बदलाव से प्रतिदिन 550 टन सिंगल यूज़ प्लास्टिक व्यर्थ की कमी लाई जा सकेगी। आईएफएटी इंडिया ने हितधारकों को चर्चा के लिए निष्पक्ष मंच प्रदान किया है। इस तरह के आयोजन न सिर्फ आम जनता को जागरुक बनाते हैं बल्कि सरकार एवं सार्वजनिक क्षेत्र को भी बेहतर एवं स्वच्छ वातावरण के लिए प्रतिबद्ध बनाते हैं।’

प्लास्टिक न्यूट्रेलिटी की तत्काल आवश्यकता पर चर्चा करते हुए डॉ आशीष जैन ने कहा, ‘‘सरकार और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय भारत में सर्कुलर अर्थव्यवस्था के निर्माण के लिए काम कर रहे हैं और प्लास्टिक के रीड्यूस, रीसायकल, रीयूज़ को बढ़ावा देने और प्लास्टिक को पर्यावरण से बाहर करने के लिए प्रयासरत हैं। आज कुछ ही हितधारक प्लास्टिक न्यूट्रेलिटी को अपना रहे हैं। प्लास्टिक की खपत, संग्रहण और रीसायक्लिंग में बड़ा अंतराल है। पिछले पांच सालों में प्लास्टिक की खपत में 21 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। जबकि सिर्फ 16 फीसदी प्लास्टिक इकट्ठा कर रीसायकल किया जाता है। मुझे विश्वास है कि आईएफएटी इंडिया 2022 उद्योग जगत के दिग्गजों के लिए सही प्रणाली का निर्माण करेगा और उन्हें अपने अनुभवों एवं रणनीतियों को साझा करने का अवसर देगा। यह मंच सभी हितधारकों को प्लास्टिक न्यूट्रल इकोनोमी के निर्माण के लिए उचित कदम उठाने हेतु प्रेरित करेगा। मुझे उम्मीद है कि इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से संग्रहण और रीसायक्लिंग की दर में 50 फीसदी बढ़ोतरी की जा सकेगी।’

प्लास्टिक व्यर्थ प्रबन्धन की रणनीतियों पर बात करते हुए महेन्द्र सिंह तंवर ने कहा, ‘‘अपने समग्र दृष्टिकोण के तहत हम मटीरियल लाइब्रेरी ऑफ इंडिया के सहयोग से ‘बियॉंन्ड प्लास्टिक’ की अवधारणा पर काम कर रहे हैं, जो मटीरियल इनोवेशन के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेन्स है। यह भारतीय उपमहाद्वीप में अपनी तरह की अनूठी अवधारणा है। हमने प्लास्टिक क्रेडिट्स का फॉर्मूला भी डिज़ाइन किया है, जिसमें 30,000 टन प्लास्टिक व्यर्थ को प्रबन्धन करने की क्षमता है, इसमें से हम पिछले 6 महीनों में 15000 टन तक पहुंच चुके हैं।  हमें खुशी है कि हम आईएफएटी 2022 में हिस्सा लेने जा रहे हें, जो उद्योग जग का एकमात्र प्रीमियर आयोजन है।’

उद्योग जगत के परिप्रेक्ष्य पर चर्चा करते हुए तुषार रंजन पटनायक, कॉर्पोरेट हैड- ईएचएस, डाबर इंडिया ने कहा, ‘‘पिछले दो साल व्यर्थ प्रबन्धन की दृष्टि से क्रान्किरी रहे हैं। सिंगल यूज़ प्लास्टिक पर पिछले महीने से रोक लगा दी गई है, यह स्थायी विकास हेतु 3 आर की दिशा में अच्छा कदम है। हम प्लास्टिक के उपयोग को कम कर सकते हैं, लेकिन इसे शून्य नहीं कर सकते। इसलिए हमें सबसे पहले एफएमसीजी सेक्टर को प्लास्टिक वेस्ट न्यूट्रल बनाना होगा। यह कार्बन फुटप्रिन्ट कम करने की दिशा मे ज़िम्मेदार ब्राण्ड के रूप में हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। पर्यावरण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता सरकारी नियमों (25 -70 फीसदी रीसायक्लेबिलिटी) से कहीं अधिक है। हम 100 फीसदी प्लास्टिक वेस्ट न्यूट्रेलिटी के साथ इस सीमा को पार कर रहे हैं। आईएफएटी इंडिया 2022 में हमें अपनी प्लास्टिक न्यूट्रल रणनीति को साझा करते हुए बहुत खुशी का अनुभव हो रहा है। अपने इन प्रयासों के द्वारा हम 2070 तक देश के शूद्ध शून्य के लक्ष्य को हासिल करने में योगदान दे रहे हैं।’

इस सेक्टर के लिए आम मंच की आवश्यकता पर बात करते हुए भुपिंदर सिंह, सीईओ मैस्से म्युनशेन इंडिया ने कहा ‘‘व्यर्थ प्रबन्धन एक बड़ी चुनौती है, जिसके लिए विभिन्न हितधारकों के सहयोग की आवश्यककता है। हितधारकों के बीच आपसी तालमेल तथा उचित समाधानों के द्वारा हम इस दिशा में बदलाव ला सकते हैं। हमें उम्मीद है कि आईएफएटी इंडिया 2022 इसके लिए अनुकूल अवसर प्रदान करेगा। हम पिछले सात सालों से आईएफएटी इंडिया के माध्यम से पर्यावरण तकनीक सेक्टर को अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। हमें खुशी है कि अपने साझेदारों, प्रतिनिधियों, खरीददारों और प्रदर्शकों के साथ जुड़ने के लिए हम दिल्ली में शो प्रीव्यू का आयोजन करने जा रहे हैं।’

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