प्रशांत महासागर में 7.7 तीव्रता का भूकंप, न्यूजीलैंड से इंडोनेशिया तक असर, सुनामी की चेतावनी & All Breaking News (Source of Aaj tak) (AKI News Breaking)

प्रशांत महासागर में 7.7 तीव्रता का भूकंप, न्यूजीलैंड से इंडोनेशिया तक असर, सुनामी की चेतावनी (Source of Aaj tak) (AKI News Breaking)

अमेरिकी भूवैज्ञानिक एजेंसी के मुताबिक, 7.7 की तीव्रता वाला भूकंप लॉयल्टी द्वीप समूह से छह मील दक्षिण-पूर्व की गहराई पर केंद्रित था. इसका असर न्यूजीलैंड से लेकर इंडोनेशिया तक हुआ है.

प्रशांत महासागर में 7.7 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप, न्यूजीलैंड से इंडोनेशिया तक असर, सुनामी की चेतावनी

दक्ष‍िण प्रशांत महासागर में शक्तिशाली भूकंप के बाद सुनामी की चेतावनी दी गई है. रेक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 7.7 मापी गई है. अमेरिकी भूवैज्ञानिक भूवैज्ञानिक एजेंसी के मुताबिक, 7.7 की तीव्रता वाला भूकंप लॉयल्टी द्वीप समूह से छह मील दक्षिण-पूर्व की गहराई पर केंद्रित था. इसका असर न्यूजीलैंड से लेकर इंडोनेशिया तक हुआ है. वहीं, ऑस्ट्रेलियाई मौसम एजेंसी ने दक्ष‍िण प्रशांत महासागर में 7.7 तीव्रता के भूकंप के कारण सुनामी आने के खबर की पुष्टि की है. Bureau of Meteorology, Australia ने लॉर्ड होवे द्वीप के लिए खतरा बताया है

इधर, अमेरिकी सुनामी चेतावनी केंद्र ने वानूआतू और फिजी के लिए 0.3 से एक मीटर (1 से 3.3 फुट) तक की सुनामी संबंधी चेतावनी जारी की है. सूचना के मुताबिक, अभी तक किसी तरह के जानमाल की क्षति नहीं हुई है. 

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ऑस्ट्रेलिया में खेले गए बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के बाद पूरी दुनिया का ध्यान भारत व इंग्लैंड के बीच खेले जा रहे टेस्ट सीरीज पर लगी है। इस टेस्ट सीरीज के पहले ही मैच में मेजबान टीम इंडिया को 227 रन से हार भी मिल चुकी है। अब भारत व इंग्लैंड के बीच टेस्ट सीरीज को लेकर पूर्व इंग्लिश स्पिनर मोंटी पनेसर ने दोनों देशों के क्रिकेट बोर्ड यानी बीसीसीआइ और ईसीबी को एक बेहतरीन सलाह दी है। उन्होंने कहना है कि भारत-इंग्लैंड टेस्ट सीरीज का नाम तेंदुलकर-कुक ट्रॉफी रख देना चाहिए।

 

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान माहौल कुछ नरम-गरम रहा… प्रधानमंत्री अपने भाषण की शुरुआत भारत के दूसरे देशों के मुकाबले कोरोना महामारी के मामले में बेहतर प्रदर्शन को लेकर की… लेकिन कुछ देर बाद कृषि कानून पर उनके बोलने के दौरान विपक्ष के शोरगुल शुरू हो गया…

 

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एक और बैंक पर संकट! RBI ने इंडिपेंडेंस को-ऑपरेटिव बैंक से पैसा निकालने पर लगाई रोक (Source of News18 hindi)

बीमा योजना के तहत बैंक का प्रत्येक जमाकर्ता अपनी 5 लाख रुपये तक की जमा राशि पर जमा बीमा दावा रकम डीआईसीजीसी (Deposit Insurance and Credit Guarantee Corporation) से प्राप्त करने का हकदार है.

 

एक और बैंक पर संकट! RBI ने इंडिपेंडेंस को-ऑपरेटिव बैंक से पैसा निकालने पर लगाई रोक

 

मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) ने महाराष्ट्र के नासिक स्थित इंडिपेंडेंस को-ऑपरेटिव बैंक लि. (Independence Co-operative Bank) से पैसा निकालने पर रोक लगा दी है. आरबीआई (RBI) ने बुधवार को एक बयान में कहा कि हालांकि बैंक के 99.88 फीसदी जमाकर्ता पूर्ण रूप से डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (Deposit Insurance and Credit Guarantee Corporation) बीमा योजना के दायरे में हैं.

पाबंदी छह महीने के लिए
निकासी पर पाबंदी छह महीने की अवधि के लिए होगी. आरबीआई ने कहा, ”बैंक की मौजूदा नकदी की स्थिति को देखते हुए, जमाकर्ताओं को बचत या चालू खाता अथवा अन्य किसी भी खाते से जमा राशि में से कोई भी रकम निकालने की अनुमति नहीं होगी. ग्राहक जमा के एवज में कर्ज का निपटान कर सकते हैं जो कुछ शर्तों पर निर्भर है.”

आरबीआई ने बुधवार को कारोबारी समय समाप्त होने के बाद और भी कुछ पाबंदियां लगाई है. इसके तहत बैंक के मुख्य कार्यपालक अधिकारी आरबीआई की पूर्व मंजूरी के बिना कोई भी कर्ज नहीं देंगे या नवीनीकरण नहीं करेंगे. इसके अलावा वे कोई निवेश भी नहीं करेंगे और न ही कोई भुगतान करेंगे.

बैंकिंग कारोबार पहले की तरह करता रहेगा
आरबीआई के अनुसार बैंक पाबंदियों के साथ अपना बैंकिंग कारोबार पहले की तरह करता रहेगा. यह पाबंदी वित्तीय स्थिति में सुधार तक रहेगी. केंद्रीय बैंक ने यह भी कहा कि वह परिस्थिति के हिसाब से निर्देशों में संशोधन कर सकता है.

क्या है डीआईसीजीसी
बैंकों में 5 लाख रुपये तक की जमा सुरक्षित होने की गारंटी  डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन की ओर से ​होती है. डीआईसीजीसी, भारतीय रिजर्व बैंक के स्वामित्व वाली सब्सिडियरी है, जो बैंक जमा पर इंश्योरेंस कवर उपलब्ध कराती है. 5 लाख के डिपॉजिट बीमा के प्रावधानों के मुताबिक, बैंक के दिवालिया होने या उसका लाइसेंस रद्द होने पर 5 लाख रुपये तक की धनराशि का भुगतान जमाकर्ता को किया जाता है, फिर चाहे बैंक में उसका कितना ही पैसा जमा क्यों न हो.

 

नौकरी की बात : फोन या कम्प्यूटर की बजाय नौकरी खोजने के लिए एम्प्लायर्स से ईमेल व Linkdin पर करें सीधे बात (Source of news18 hindi)

नौकरी की बात : फोन या कम्प्यूटर की बजाय नौकरी खोजने के लिए एम्प्लायर्स से ईमेल व Linkdin पर करें सीधे बात

 

कोरोना के दौर में हेल्थ केयर सेक्टर (Healthcare Sector) रोजगार की मांग बढ़ी है. इस बार नौकरी की बात (Naukari ki bat) सीरिज में अपोलो टेली हेल्थ कंपनी (Apollo TeleHealth) के सीईओ विक्रम थापलू (Vikram Thaploo) से जानिए, हेल्थकेयर सेक्टर और उनकी कंपनी में नौकरियों के अवसर व इसकी तैयारियों के तरीके…

 

नई दिल्ली. कोरोनावायरस (Coronavirus) की वजह से कई नौकरियां चली गई या फिर नए अवसर बंद हो गए, लेकिन अब अर्थव्यवस्था पटरी पर लौट रही है. रोजगार के मौके खुलने लगे हैं. अपने युवा पाठकों के लिए न्यूज18 ने देश के टॉप एचआर लीडर (HR Leader) के साथ खास सीरिज “नौकरी की बात” (Naukari ki bat) शुरू की है. इस बार कोरोना के दौर में सबसे ज्यादा रोजगार डिमांड वाले हेल्थ केयर सेक्टर (Healthcare Sector)की बात. अपोलो टेली हेल्थ कंपनी (Apollo TeleHealth) के सीईओ विक्रम थापलू (Vikram Thaploo) से जानिए, हेल्थकेयर सेक्टर और उनकी कंपनी में नौकरियों के अवसर व इसकी तैयारियों के तरीके…

सवाल : जिन लोगों की महामारी के दौरान नौकरी गई, उन्हें क्या करना चाहिए?
जवाब : पूरी दुनिया ही महामारी की वजह से बहुत बुरी तरह से प्रभावित हुई है. हमारे देश में बेरोजगारी की दर बहुत तेजी से नीचे आई है. लॉकडाउन (Lockdown) के बाद से बेरोजगारी की दर 27.1% हो चुकी है. खास कर मेट्रोपोलिटिन शहरों में बेरोजगारी बढ़ी है. एक अनुमान के मुताबिक 12.2 करोड़ लोगों को महामारी की वजह से अपने रोजगार से हाथ धोना पड़ा है जिसमें से 75% लोग छोटे व्यक्ति और दैनिक मजदूर है. नौकरी खो चुके लोग आउटप्लेसमेंट सर्विस की तलाश कर सकते हैं. कई मीडियम साइज और बड़े आर्गेनाइजेशन के पास आउटप्लेसमेंट सर्विसेस का प्रावधान है. इसका मतलब यह है कि अगर आर्गेनाइजेशन किसी कर्मचारी को जाने देते हैं, तो व्यक्ति को नौकरी खोजने में ये आर्गेनाइजेशन उसकी मदद कर सकते है. इस उद्देश्य के लिए कंपनियां उन आउटप्लेसमेंट फर्मों की मदद लेती हैं जो चयनित कर्मचारियों को वैकल्पिक रोजगार खोजने में मदद करते है. कर्मचारी री-स्किलिंग एरिया की भी तलाश कर सकते हैं क्योंकि कई स्किल-सेट हैं जिनके लिए कंपनियां अभी भी लोगों को काम पर रख रही हैं. जॉब पोर्टल या प्रोफेसनल नेटवर्किंग साइटों को विजिट कर सकते हैं और अपनी स्किल से सबंधित सेक्टर में नौकरी की तलाश कर सकते हैं. आईटी, एडवरटाईजिंग, ई-कॉमर्स, फाईनैन्सियल सर्विसेस और मीडिया / मनोरंजन जैसे क्षेत्रों में फ्रीलांस की नौकरियां धीरे-धीरे बढ़ रही हैं. स्किल कई ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म अब एक अस्थायी आधार पर मुफ्त कोर्स प्रदान कर रहे हैं और नौकरी को खो चुके लोग इस अवसर का फायदा उठा सकते हैं।

Vikram Thaploo

सवाल : नौकरी गवां चुके लोगों को नई स्किल सीखने की जरुरत है? वे कैसे नई स्किल डेवलप कर सकते हैं?
जवाब : कोविड-19 के समय में जॉब मार्केट पूरी तरह से बदल गया है. अब समय आ गया है कि नई स्किल सीखने के लिए मुफ्त या कम लागत वाले ऑनलाइन कोर्स को करने और नई स्किल में सर्टिफिकेट लेना चाहिए. नई स्किल सीखना या तो आपके मौजूदा जॉब ट्रेजेक्टरी का कॉम्प्लीमेंटरी हो सकता है, या आपको एक नया कैरियर दे सकता है.

सवाल : महामारी के बाद से बहुत सारे कोर्स ऑनलाइन उपलब्ध है. अगर कोई इन कोर्स को करता है तो क्या उन्हें कंपनियां काम पर रखेंगी?
जवाब : आज के दौर की लर्निंग एक जरूरी करियर है. यह तकनीक को विकसित करने के लिए और स्किल को वर्तमान मार्केट के मुताबिक बनाए रखने के लिए जरूरी है. एम्प्लायर्स (नौकरी पर रखने वाले लोग) ऑनलाइन प्राप्त की गई डिग्री का उतना ही सम्मान करते हैं, जितना कि स्कूल या इंस्टीटयूट से प्राप्त की डिग्री को महत्व देते है. वे समझते हैं कि आज के समय में तकनीकी का विकास हो चुका है और ज्यादा से ज्यादा कर्मचारी अपनी ट्रेनिंग और एजुकेशन ऑनलाइन प्राप्त कर रहे है. मैनेजर्स एजुकेशन को जारी रखने और प्रोफेशन डेवलपमेंट को अहमियत देते है. रिज्यूम के एजुकेशन सेक्शन में रिलिवेंट कोर्स और प्रोग्राम रहने से लोगों को प्रोफेशनली आगे बढ़ने और कर्व से आगे रहने में मदद मिलती है.

सवाल :जब मार्केट धीरे-धीरे खुल रहा है तो कहां और कैसे युवाओं को नौकरी की तलाश करनी चाहिए?
जवाब : अब तो एक्सपीरियंस कैंडीडेट में भी बहुत ज्यादा कॉम्पीटीशन बढ़ गया है. कई एम्प्लायर्स अभी भी कोविड के पहले वाले एक्सपीरियंस और एजुकेशन की जरूरतों वाली मानसिकता में अटके हुए है. यह जरूरी है कि जॉब खोजने का एक शेड्यूल बनाएं, कंप्यूटर या फोन पर जॉब खोजने में बहुत सारा समय खपाने से प्रोडक्टिविटी कम हो सकती है। अन्य सहायक दृष्टिकोण यह हो सकता है हाइरिंग करने वाले या एम्प्लायर्स से ईमेल या लिंकेडिंन पर सीधे बात करें. यह मात्र जॉब के मौके के बारें में पूछने या अपार्चुनिटी को वोलंटियर करने के बारे में ही नहीं हो सकता है, इस तरह की बातचीत से आपको एम्प्लायीमेंट मार्केट को समझने में मदद मिलेगी. यह भी जरूरी है कि इस समय में रिज्यूम को फिर से नया रूप दें ताकि यह रिक्रूटर्स का ध्यान केन्द्रित कर सके. रिक्रूटर्स के बीच सकारात्मक प्रभाव बनाने के लिए नौकरी ढूढ़ने वाले कैंडिडेट को अपने रिज्यूम में स्किल और सर्टिफिकेट को जोड़ना चाहिए.

सवाल : क्या कोविड-19 के बाद जॉब देने की प्रक्रिया में बदलाव हुआ है?
जवाब : कोविड-19 और लॉकडाउन की वजह से कई कंपनियों को हायरिंग के लिए अपनी प्रक्रिया को बदलना पड़ा और सोशल डिस्टेंसिंग उपायों को अपनाना पड़ा. कंपनियों को वर्चुअल रिक्रूमेंट करनी पड़ी. रिक्रूटर्स को हर जॉब प्लेसमेंट के ह्युमन एलिमेंट को ध्यान में रखने की जरूरत है.

सवाल : इस कठिन समय में इंटरव्यू के लिए कैसे तैयारी करनी चाहिए?
जवाब : जॉब इंटरव्यू वर्चुअल हो तब रिस्पांड करने और ध्यान से सुनना बहुत अहम है. इससे पता चलता है कि आप कंवरसेशन में इन्वॉल्व है और अपार्चुनिटी के बारे में उत्साहित है. अच्छी तरह से रिसर्च करना अभी भी महत्वपूर्ण बात है. हर किसी को स्किल नौकरी के विवरण को ध्यान से पढना चाहिए. इसके अलावा कंपनी और इंडस्ट्री के बारे में रिसर्च करनी चाहिए. कंपनी की वेबसाइट, एन्युअल रिपोर्ट, न्यूज आर्टिकल्स, इंटव्यूअर्स की लिंक्डन प्रोफाइल और भविष्य के टीम मेंबर के बारें में अच्छी रिसर्च करनी चाहिए.

सवाल : वर्तमान परिस्थितियों में किस तरह के करियर को अपनाया जा सकता है?
जवाब : श्रम सांख्यिकी ब्यूरो (बीएसएल) के अनुसार हेल्थकेयर जॉब्स में मांग बहुत ज्यादा है और 2019 से 2029 तक यह मांग 14% बढ़ने का अनुमान है. रजिस्टर्ड नर्स, क्लिनिकल लेबोरेटरी टेक्नोलोजिस्ट, फार्मा और बायोटेक्नोलॉजिस्ट में एपिडेमियोलॉजिस्ट, रिसर्च एसोसिएट और एपीआई एक्सपर्ट की मांग है. सुरक्षा से जुड़ी नई भूमिकाओं की मांग बढ़ती रहेगी और कंपनियां अपने वर्कप्लेस की कार्यप्रणाली को सख्त हेल्थ प्रोटोकॉल और अधिक लचीले कार्य विकल्पों के साथ जारी रखेंगी. जब से महामारी शुरू हुई है तब टेलीमेडिसिन के क्षेत्र में भी काफी वृद्धि देखी गयी. यह अब तेजी से न्यू नार्मल बनता जा रहा है. इससे निकट भविष्य में रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी. रेस्टोरेंट, रिटेल, गोदाम, कारखाने, परिवहन आदि क्षेत्र को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है. इनसे नौकरियों के जाने का खतरा है क्योंकि इन जगहों पर रोबोट और सॉफ्टवेयर आ सकते है.

सवाल : आर्टिफिशियल इंटेलीजेन्स और बिग डाटा को ध्यान में रखते हुए भविष्य के लिए कौन से बदलाव देखे जा सकते हैं?
जवाब : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई को व्यवहार में परिवर्तन और नीतियों के प्रभावों की भविष्यवाणी करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. कुछ एनालॉग-हैवी इंडस्ट्री जैसे कि खनन, ऊर्जा, मैन्युफैक्चरिंग और फूड प्रोडक्शन (चिकन प्रोसेसिंग, मांस की कंपनियां) जैसी इंडस्ट्री जरूरत होने पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस उपकरण जैसे कि कंप्यूटर विजन और रोबोटिक्स को काम पर लगा सकते है. कई अन्य इंडस्ट्री को यह लग सकता है कि उनके पास एआई को लागू करने का बेहतरीन मौका है. हेल्थकेयर के लिए एआई का इस्तेमाल विभिन्न बीमारियों के लिए हलमिनटों में निकालने के लिए किया जा सकता है. ऐसी उन्नति पहले से ही हो रही है और आगे बिग डाटा से जो रिसर्च होगा उससे भी यह उन्नति होती रहेगी.

सवाल : क्या आप हमारे पढ़ने वाले को बता सकते है कि हेल्थकेयर सेक्टर में नौकरियों की क्या संभावनाएं है?
जवाब : भारत में हेल्थकेयर इंडस्ट्री में हॉस्पिटल, मेडिकल उपकरण, क्लिनिकल ट्रायल्स, आउटसोर्सिंग, टेलीमेडिसिन, मेडिकल टूरिज्म, हेल्थ इंश्योरेंस और मेडिकल इक्विपमेंट शामिल है. इंडस्ट्री अपने मजबूत कवरेज, सर्विसेस और सरकारी तथा प्राइवेट कंपनियों द्वारा बढ़ते खर्च के कारण जबरदस्त गति से आगे बढ़ रही है1 हॉस्पिटल इंडस्ट्री 2017 में 61.8 बिलियन डॉलर से लेकर 2023 तक 132 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है. यह 16-17% के CAGR दर से वृद्धि कर रही है. डायग्नोस्टिक्स मार्केट 2012 में 5 बिलियन डॉलर से लेकर 2022 तक 32 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है. इस सेक्टर में प्राइमरी और प्रीवेंटिव हेल्थकेयर एरिया में कई रोमांचक मौके मिल सकते है.

सवाल : हेल्थकेयर सेक्टर में विभिन्न पदों के लिए किस तरह की पढ़ाई और स्किल की जरूरत पड़ती है?
जवाब : तेजी से विस्तार होने से हेल्थकेयर मैनेजमेंट प्रोफेशनल्स की मांग बढ़ी है. हेल्थ आईटी मैनेजर्स के पास बहुत सारे मौके होते हैं. वे आईटी कंपनियों और हॉस्पिटल, इम्प्लेमेंटेशन, मैनेजमेंट बदलाव, रिक्वायरमेंट को इकट्ठा करने, डेटा एनालिटिक्स और अन्य डोमेन स्पेसिलिस्ट में भूमिका निभा सकते है.

सवाल : हमें आप अपनी कंपनी के हाइरिंग प्रोसेस के बारें में बताएं और कैसे नौकरी ढूढ़ने वाले लोग आपकी कंपनी से संपर्क साध सकते हैं?
जवाब : आप अपोलो टेलीहेल्थ वेबसाईट के ‘करियर’ सेक्शन पर जा सकते है और वहां पर नौकरी से सम्बंधित जो भी मांग होगी वहां सभी जानकारी उपलब्ध होगी. आप ‘पोजीशन’ और ‘लोकेशन’ डालकर पर नौकरी को ढूढ़ सकते है. किसी नौकरी के लिए अप्लाई करने हेतु आपको ‘अप्लाई नाऊ’ पर क्लिक करना होगा, इससे आपके सामने एक फॉर्म खुलकर आएगा जिसमे आपको अपनी पर्सनल जानकारी, एजुकेशन और प्रोफेशनल डिटेल भर के सबमिट करना होगा. एप्लीकेशन फॉर्म सबमिट करने के बाद हमारे रिक्रुटर्स अगर आपसे संपर्क करेंगे. हमने कई जॉब पोर्टल्स से भी इस प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए साझेदारी की है ताकि कैंडिडेट आसानी से हमारे ऑर्गनाइजेशन में नौकरी के लिए अप्लाई कर सके.

सवाल : आप किस प्रकार की स्किल की मांग करते है और आप उसका मूल्यांकन कैसे करते हैं?
जवाब : भारत में प्राइवेट हॉस्पिटल्स, स्वतंत्र हेल्थकेयर वेंचर्स और मीडियम साइज के क्लीनिक पूरे भारत में खुलने में वृद्धि देखी गई है. चुनौती यह कि कैसे इस परिस्थिति का सामना किया जाए क्योंकि हेल्थकेयर सेक्टर इस समय हॉस्पिटल और मैनेजमेंट में स्पेसिलाइज्ड ट्रेंड प्रोफेशनल्स की कमी को झेल रहा है. किसी कैंडिडेट की स्किल का पता लगाने का सबसे बढ़िया तरीका प्रैक्टिकल एसेसमेंट है और अन्य कैंडीडेट की क्षमता को मापने के लिए एक सब्जेक्टिव तरीका भी काम आ सकता है.

सवाल : इस सेक्टर और आपकी कंपनी की वृद्धि की क्या संभावनाएं हैं?
जवाब : इन्फोर्मेशन टेक्नोलोजी की व्यापकता ने न केवल कम्युनिकेशन के क्षेत्र में क्रांति लाई है बल्कि इसने हेल्थकेयर के लिए नया आयाम भी खोल दिया है.मार्केट रिसर्च के मुताबिक वैश्विक टेलीहेल्थ मार्केट 2026 तक लगभग 20 बिलियन अमरीकी डालर तक बढ़ने की उम्मीद है. भारत का टेलीहेल्थ मार्केट भी तेजी से बढ़ रहा है क्योंकि बहुत सारे हेल्थकेयर आर्गेनाईजेशन टेलीहेल्थ को भौगोलिक विषमताओं को दूर करने के लिए अधिक से अधिक इस्तेमाल कर रहे है. अपोलो टेलीहेल्थ में हमने पहले से आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हिमांचल प्रदेश, झारखण्ड और अन्य राज्यों में टेलीहेल्थ प्रोजेक्ट को शुरू करने के लिए वहां की राज्य सरकारों के साथ साझेदारी की है. अगले 10 सालों में ग्रामीण क्षेत्रों में टेलीहेल्थ के जरिए कंसल्टेशंस की संख्या बढ़ने की संभावना है. यहां तक कि हार्ट फेल होने, गंभीर दुर्घटनाओं और सांप के काटने जैसी इमरजेंसी मेडिकल कंडीशन को अपोलो टेलीहेल्थ द्वारा प्रभावी रूप से जुड़े हेल्थकेयर उपकरणों के माध्यम से क्रोनिक कंडीशन की निगरानी के साथ नियंत्रित किया जा रहा है.

 

केरल के इस कपल के हाथ लगा 3.3 करोड़ रुपये का जैकपॉट, बताया कैसे खर्च करेंगे यह पैसा (Source of news18 hindi)

केरल के इस कपल के हाथ लगा 3.3 करोड़ रुपये का जैकपॉट, बताया कैसे खर्च करेंगे यह पैसा

केरल के एक व्यक्ति को 3.3 करोड़ रुपये की लॉटरी लगी है. यह लॉटरी एशिया में सबसे तेजी से पॉपुलर हो रहे लोटोलैंड (Lottoland) के जरिए लगी है. शाजी मैथ्यू नाम के इस शख़्स ने लॉटरी जीतने के बाद अपने आगे के प्लान के बारे में भी जानकारी दी हैं.

 

नई दिल्ली. एशिया में तेजी से पॉपुलर हो रहे लोटोलैंड (Lottoland) ने अपने पहले जैकपॉट का ऐलान कर दिया है. केरल में अपनी वेडिंग एनिवर्सरी सेलिब्रेट कर रहे है एक कपल के हाथ लोटोलैंड का पहला जैकपॉट लगा है. शाजी मैथ्यू और उनकी पत्नी ने इस लॉटरी से 3.3 करोड़ रुपये जीता है. एक इंटरव्यू में शाजी ने बताया कि उन्होंने जब पहली बार ईमेल देखा और लोटोलैंड से कॉल आया तो उन्हें लगा कि किसी ने शरारत की है. शाजी से जब यह पूछा गया कि वो इतनी बड़ी रकम का क्या करेंगे तो उन्हांने बताया कि यह रकम उनके परिवार की जिंदगी बदलने वाली है. उन्होंने बताया कि वो अपनी पत्नी के साथ एक ज्वाइंट का अकाउंट में पैसा रखते हैं. अपने बच्चों के लिए कॉलेज फंड बचाएंगे. उन्होंने यह भी बताया कि वो एक नया घर बनवा रहे हैं.

लोटोलैंड के एक प्रतिनिधि ने कहा, ‘हम अपनी यात्रा में इतनी तेज प्रगति से खुश हैं. कुछ समय पहले ही हमने पहला लखपति को सेलिब्रेट किया है और हम अब शाजी और उनके परिवार के साथ हम करोड़पति की तरफ भी बढ़ चुके हैं.’

अनाथालय खोलने की योजना
उन्होंने आगे कहा, ‘हमें पता चला है कि शाजी इस रकम के एक हिस्से से अपने गांव के नज़दीक ही अनाथालय खोलने की योजना बना रहे हैं. किसी व्यक्ति को इस तरह से अपना पैसा खर्च करने की बात सुनना एक खूबसूरत एहसास है. हमें इससे ज्यादा खुशी नहीं मिल सकती कि शाजी हमारे पहले करोड़पति विजेता बने.’

आगे भी लॉटरी खेलते रहेंगे शाजी
शाजी ने लोटोलैंड के साथ वेरिफिकेशन प्रोसेस को पूरा कर लिया है और उनके अकाउंट में पैसे जमा हो चुके हैं. इस इंटरव्यू में जब शाजी से पूछा गया कि वो लोटोलैंड से जुड़ने वाले को क्या सलाह देना चाहते हैं तो उन्होंने कहा, ‘यह जीतने एक मौका है. व्यक्गित तौर पर मैं इसे आगे भी जारी रखूंगा, खासतौर पर जब इस सप्ताह का पावरबॉल जैकपॉट 5,000 करोड़ रुपये के पार जा चुका है. मैं नहीं खेलकर इसे खोना नहीं चाहता!’

तेजी से पॉपुलर हुआ लोटोलैंड
बता दें कि करीब 7 साल पहले 2013 में पहली बार लोटोलैंड लॉन्च हुआ था. इसके बाद से यह लगातार आगे बढ़ा है, जिसमें लोग ऑनलाइन ही लॉटरी पर दांव खेल सकते हैं. अमेरिका का मेगामिलियन्स और पावरबॉल 1 अरब डॉलर जैकपाट के पार जा सकते हैं. 2018 में ही दक्षिण कैरोलाइना के एक व्यक्ति को 1.6 अरब डॉलर यानी करीब 8,000 करोड़ रुपये की लॉटरी लगी थी. पहली बार इन लॉटरी को लोटोलैंड के जरिए एक्सेस किया जा सकता है. मेगामिलियन्स और पावरबॉल लॉटरीज 5,000 करोड़ रुपये के पार जा चुके हैं. इसी सप्ताह शनिवार और रविवार को ये दोनों लॉटरियां ड्रॉ होने वाली हैं.

 

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